शरण में आये हैं हम तुम्हारी, दया करो हे दयालु भगवन् ।

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शरण में आये हैं हम तुम्हारी, दया करो हे दयालु भगवन् ।

प्रार्थना

शरण में आये हैं हम तुम्हारी,
दया करो हे दयालु भगवन् ।
संभालो बिगड़ी दशा हमारी,
दया करो हे दयालु भगवन् ।।1।।

न हममें बल है न हममें शक्ति,
न हममें साधन न हममें भक्ति।
तुम्हारे दर के हैं हम भिखारी,
दया करो हे दयालु भगवन् ।।2।।

जो तुम हो स्वामी तो हम हैं सेवक,
जो तुम हो पालक तो हम है बालक।
जो तुम हो ठाकुर तो हम हैं पुजारी,
दया करो हे दयालु भगवन् ।।3।।

सुना है हमने कि हम तुम्हारे,
तुम्हीं हो सच्चे प्रभु हमारे।
तो सुध हमारी है क्यों बिसारी,
दया करो हे दयालु भगवन् ।।4।।

बुरे हैं जो हम तो हैं तुम्हारे,
भले हैं जो हम तो है तुम्हारे ।
तुम्हारे होकर के है हम दुःखारी,
दया करी हे दयालु भगवन् ।।5।।

प्रदान कर दो महान् शक्ति,
भरो हमारे में ज्ञान भक्ति।
तभी कहलाओगे तापहारी,
दया करो हे दयालु भगवन् ।।6।।