अपने भक्तों में हमको बिठा लीजिए

0
143
अपने भक्तों में हमको बिठा लीजिए

प्रार्थना

अपने भक्तों में हमको बिठा लीजिए,
ठोकरें खा रहे हैं बचा लीजिए,
नैया जीवन की है नाथ मझधार में,
करके करुणा किनारे लगा दीजिए।।
अपने भक्तों में हमको ………..

छा रहा है अन्धेरा मेरे चारों ओर,
ज्ञान ज्योति का मन में जगा दीजिए।।
माना होगा किसी को किसी का पिता,
मेरा तू ही है मुझसे लिखा लीजिए।।
अपने भक्तों में हमको …………

वेद वाणी तेरी नाथ अमृत भरी,
भरके प्याला मुझे इक पिला दीजिए।
और पापों के है मेरे मन की गति,
और चरणों के अपने लगा लीजिए।।
अपने भक्तों में हमको ………..

‘देश’ को है पिता! तेरा ही आसरा,
गोद अपनी में स्वामी बिठा लीजिए।
गोद तेरी से न बढ़कर कोई सुखदायी जगह,
पुत्र तेरा ‘ध्रुव’ वहीं बैठा रहे माता सदा।।
अपने भक्तों में हमको ……….