धर्म को उठाने वाला अधर्म को ढानेवाला

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धर्म को उठाने वाला अधर्म को ढानेवाला

दयानन्द बावनी
कवि दूलेराय काराणी

बोल-बाला

धर्म को उठाने वाला अधर्म को ढानेवाला।
आंधी को उड़ानेवाला ज्ञान का उजाला तू॥

आप ही के आप वस्त्रालंकारें लुटानेवाला।
कौपीन लगानेवाला नेता ही निराला तू॥

आर्यवर आला प्रेम पीयूष पिलानेवाला।
वीर गान गानेवाला वो ही वेदोंवाला तू॥

काराणी कहत वेद बंसी के बजानेवाला।
तेरी बोलबाला मेरा परम कृपाला तू॥२३॥