किसी के काम जो आए उसे इनसान कहते हैं।

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इनसान

(तर्ज-बहारो फूल बरसाओ)

किसी के काम जो आए उसे इनसान कहते हैं।
पराया दर्द अपनाए उसे इनसान कहते हैं।
किसी के काम जो आए………

१. कभी धनवान है कितना कभी इनसान निर्धन है।
कभी सुख है कभी दुःख है इसी का नाम जीवन है।
जो मुश्किल में न घबराये उसे इनसान कहते हैं।
किसी के काम जो आए………

२. यह दुनियाँ एक उलझन है कहीं धोखा कहीं ठोकर।
कोई हँस हँस के जीता है कोई जीता है रो रो कर।
जो गिर कर फिर संभल जाये उसे इनसान कहते हैं।
किसी के काम जो आए…………

३. अगर ग़लती रुलाती है तो यह राह भी दिखाती है।
बशर ग़लती का पुतला है यह अक्सर हो ही जाती है।
जो ग़लती करके पछताये उसे इनसान कहते हैं।
किसी के काम जो आए………..

४. अकेले ही जो खा खा कर सदा गुज़रान करते हैं।
यों भरने को तो दुनियाँ में पशु भी पेट भरते हैं।
‘पथिक’ जो बाँट कर खाये उसे इनसान कहते हैं।
किसी के काम जो आए……….