अनगिनत प्राणी जगत् में सब का दाता एक है।

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सब का दाता एक है

(तर्ज – सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है)

  • अनगिनत प्राणी जगत् में सब का दाता एक है।
    सब पिताओं का पिता और जगत माता एक है।
    अनगिनत प्राणी जगत् में……

१. बात इतनी सी भला क्यों समझ में आती नहीं
खाने वाले हैं करोड़ों पर खिलाता एक है।
अनगिनत प्राणी जगत् में……….

२. सब के कर्मों के मुताबिक फल सभी को दे रहा जीव हैं
जग में अनेकों पर विधाता एक है।
अनगिनत प्राणी जगत् में……….

३. ज़रें ज़र्रे में समाया सब जगह मौजूद है
इन सभी फूलों में हँसता मुस्कराता एक है।
अनगिनत प्राणी जगत् में……….

४. और जो कुछ भी दिखाई दे रहा संसार में
ख़ुद बनाकर के चलाता फिर मिटाता एक है।
अनगिनत प्राणी जगत् में………..

५. हर तरफ़ उसके नज़ारे ही नज़ारे देखिये
हर नज़ारे में नज़ारा नज़र आता एक है।
अनगिनत प्राणी जगत् में………..

६. ‘पथिक’ जितने भी सितारे हैं खुले आकाश में
रोशनी बनकर सभी में जगमगाता एक है।
अनगिनत प्राणी जगत् में……….