भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है।

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भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है।

भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है।

भगवान तेरी महिमा क्या खूब निराली है।
एक घर में अन्धेरा है एक घर में दिवाली है।

१ क्या अजब तमाशा है,
क्या खेल रचाया है।
ये खेल तेरा भगवन्,
कोई जान न पाया है।
कोई अरबों का वाली है,
पर गोद से खाली है……

२. कोई इतना सुन्दर है,
फूलों से सजाते हैं।
कवि भी कविता कर के,
गुण रूप का गाते हैं।
बदसूरत कोई इतना,
ज्यों रजनी काली है….

३. तकदीर की उलझन है,
कर्मों का फासा है।
दर-दर का भिखरी है,
एक हाथ में कासा है।
भर पेट ना मिलता है,
भोजन का सवाली है……

४. संसार पहेली है,
उलझन ही उलझन है।
‘बैमोल’ ये रिश्तों का,
कैसा ये बन्धन है।
कुछ दिन के लिए हमने,
एक दुनियों बसाली है…