पत्थरों से फोड़ कर सिर आज मर जाऊँगी मैं

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पत्थरों से फोड़ कर सिर आज मर जाऊँगी मैं

पत्थरों से फोड़ कर सिर
आज मर जाऊँगी मैं,
बुजदिलों, कमजोर दुनियाँ में
न कहलाऊँगी मैं।
जीते जी चाण्डाल क्षत्राणी

को छू सकता नहीं,
मरते – मरते आज दुनियाँ को
यह दिखलाऊँगी मैं।।