कजा गीदड़ की जब आती
कजा गीदड़ की जब आती
तो रुख जंगल को करता है,
स्वयं ही आनकर मूरख
सौत के मुँह में पड़ता है।
पकड़ कर शेर उसको
बस वहीं दबोच देते हैं,
एक ही पल में उसकी
हड्डी पसली नोच लेते हैं।।
कजा गीदड़ की जब आती
कजा गीदड़ की जब आती
तो रुख जंगल को करता है,
स्वयं ही आनकर मूरख
सौत के मुँह में पड़ता है।
पकड़ कर शेर उसको
बस वहीं दबोच देते हैं,
एक ही पल में उसकी
हड्डी पसली नोच लेते हैं।।
जीवन खत्म हुआ तो,जीने का ढंग आया।
योगीराज श्रीकृष्ण का, जीवन-चरित्र पवित्र।
सुनो सुनो ऐ दुनियाँ वालों, दयानन्द की अमर कहानी।
दयानन्द ने गर जगाई न होती।
चमकेंगे जब तलक ये, सूरज व चांद तारे।
गोलियाँ सीने पे खा के चल दिये।
देश का सेवक आर्य समाज
सुखी बसे सन्सार
उठो आर्य वीरों, तुम जग को जगा दो।
देश धर्म पर हंसकर मरना, भगवान् हमें सिखा देना।
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