कजा गीदड़ की जब आती
कजा गीदड़ की जब आती
तो रुख जंगल को करता है,
स्वयं ही आनकर मूरख
सौत के मुँह में पड़ता है।
पकड़ कर शेर उसको
बस वहीं दबोच देते हैं,
एक ही पल में उसकी
हड्डी पसली नोच लेते हैं।।
कजा गीदड़ की जब आती
कजा गीदड़ की जब आती
तो रुख जंगल को करता है,
स्वयं ही आनकर मूरख
सौत के मुँह में पड़ता है।
पकड़ कर शेर उसको
बस वहीं दबोच देते हैं,
एक ही पल में उसकी
हड्डी पसली नोच लेते हैं।।
बोल बोल निर्भय आर्यवीर जय जय।
आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायताम्।
भूमि माता की महती महिमा
हे विभो आनन्दसिन्धो मे च मेधा दीयताम्।
वेदविद्या के विनोदी, बुद्धि बुद्ध विहार थे।
सुन्दर भोजन वस्त्र, राजसुख जिसने छोड़ा।
जंगम स्थावर का राजा
तोड़ कर दुनियाँ के बन्धन प्रभु दीवाना बन।
जिस को प्रभु के नाम का जग में सहारा मिल गया।
स्वामी से कौन नहीं माँगता ?
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