हम मानवों का हे प्रभो
हम मानवों का हे प्रभो,
जीवन पुनीत हो।
विश्वास आपका हो
धर्म में प्रतीति हो।
संध्यादि पंचयज्ञ हम,
स्वाध्याय नित करें।
प्रचलित मस्त विश्व में
वेदोक्त रीति हो।।
हम०१ वातावरण विशुद्ध
विशद् विश्व हो राग-द्वेष दूर,
परस्पर में बढ़ते ही रहें
पाँव सदा कर्म बरसात
बवण्डर हो, धूप हो या का
प्रीति क्षेत्र बने। हो।।
हम०२ में। शीत हो।। हम
०३ फहराये ध्वजा ओ३म्
की संसार में ‘प्रकाश’ ।
हो हार असुर दल की
आर्यों की जीत हो।। हम०४










