मेरी माँ शेरों वाली है-
मेरी माँ शेरों वाली है-
मेरी माँ शेरों वाली है।
जिसके शेरों की दुनियाँ में
शान निराली है।
बात ये नहीं आज की
भगत सुखदेव लाज की।
नींव बिस्मिल शेखर ने हिला दी
ब्रिटिश राज की।
रहे जेलों के अन्दर,
महात्मा तिलक सावरकर।
ऋषि ने क्रान्तिकारी
सत्यार्थप्रकाश को लिखकर-ओऽऽऽऽ
‘कर्मठ’ गुलामी की जंजीर तोड़ के
डाली है मेरी माँ….।
शिवा प्रताप शेर नर,
हिला दिया ओरंग अकबर।
समर में चमका भाला,
नाज था चेतक ऊपर।
वार नहीं जिसका झिला था,
यवन मिट्टी में मिला था।
गरजता था पूना में,
तख्त दिल्ली का हिला था-ओऽऽऽऽ
वीर शिवा-सा आज नहीं
कोई बलशाली है-मेरी माँ….।
जहाँ हर रोज जबानी,
नाम लेकर के कहानी।
सुनाती थी काबुल में,
जो सुत को रोता पाया,
कभी बच्चों को पठानो।
जरा भी शोर मचाया।
कहो सुत सो जा माँ ने,
हरिसिंह नलवा आया-ओऽऽऽऽ
भाग उठा अरिदल कर में
जब तेग सम्भाली है-मेरी माँ….।
भावना जगी थी मन में,
उठे थे शोले तन में।
नीच से बदला लेने,
गया ऊधम लन्दन में।
कैकस्टन हाल में फायर,
किया जहाँ मारा डायर।
मचा हंगामा एकदम,
दहल गए सारे कायर-ओऽऽऽऽ
पेन्टनविला जेल में हंसकर
फांसी खा ली है-मेरी मां….।
रहे भयभीत फिरंगी,
कांप गये लाट भी जंगी।
रोक ना पाई उसको,
जहाँ संगीने नंगी।
मिला हिटलर ने पनाह दी,
जाओ जापान सलाह दी।
कहा दो खून सिपाही,
मैं तुमको दूं आजादी-ओऽऽऽ5
याद सभी को आज तलक
नेता चंगाली है मेरी माँ….।
पढ़ो इतिहास पुराना,
शेर था एक वो मर्दाना।
खाक मेवाड़ की छानी,
नाम जिसका महाराणा।
नहीं बन्धन में आया,
न उसने शीश झुकाया।
वीर धरती पर सोया,
हाथ पर खाना खाया-ओऽऽऽऽ
घास की रोटी खाकर बेशक
ये उम्र बितानी है-मेरी माँ….।
शेर हैं उसके अनेकों,
जिधर भी चाहे देखो।
लेख, श्रद्धानन्द देखो,
कहीं विरजानन्द देखो।
महर्षि दयानन्द है,
त्याग की मूर्ति देखो।
आज जो देश के प्यारे,
उन्हें हैं प्राणों से प्यारे-ओऽऽऽऽ
नकली शेर पे बैठा के कह रहे
शेरों वाली है-मेरी माँ….।










