इश्क जिनको है अपने वतन से

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इश्क जिनको है अपने वतन से

इश्क जिनको है अपने वतन से,
वे खुदी को मिटाते रहेंगे।
शर्मा महफिल में जलती रहेगी,
तो पतंगे भी आते रहेंगे ॥

आशिकों दर्दे दिल हो तो बोलो,
नब्ज को न इश्क कहके तोलो।
यूं ही क्या बस हविष के नशे में
जिन्दगी को लुटाते रहेंगे।

इश्क करने से आता नहीं है,
इसका बुझदिल से नाता नहीं है।
सच्चे आशिक जो अपने सरों के
वो खुशी से कटाते रहेंगे।

इश्क करने का जो है तरीका,
उसको आजाद बिस्मिल ने सीखा।
उनका दुनियां से जाना न समझो,
वो सदा याद आते रहेंगे।

छोड़कर चल दिए आशियां जो,
उनको दुनियां चमन बन गई है।
जिसमें इन्सानियत न दफन हो,
वो ऐसी दुनियां बसाते रहेंगे।