सत्संग भजनावली (तर्ज-रामायण चोपाई)
गायक गुणी कवि शायर
ना राग-रागिनी गाता हूं।
यह मानव-मानव बन जाए
मैं ऐसा राग सुनाता हूं ॥
भूले जो ‘नरदेव’ सत्यपथ
अन्धकार में फंस करके।
दिखलाता उनको सही मार्ग
मैं वैदिक दीप जला करके
हिन्दू, मुस्लिम, सिख,
जैन, ईसाई नहीं बनाता हूं।
मैं सत्य सनातन वैदिक
धर्म का जग को पाठ पढ़ाता हूं।
ब्राह्मण, क्षत्री, वैश्य, शूद्र को
निज कर्तव्य बताता हूं।
लोगों के सोये हुए पुनः
मैं शुभ संस्कार जगाता हूं ॥










