हम सब मिलके आये दाता तेरे दरबार।
हम सब मिलके आये
दाता तेरे दरबार।
भरदे झोली सबकी
तेरे पूरण भण्डार ।।
होवे जब प्रातःकाल
निर्मल होके तत्काल,
अपना मस्तक झुका के,
करके तेरा ख्याल,
तेरे दर पर आके बैठे
सारा परिवार ।।۹۱۱
लेके दिल में फरियाद करते
हम तुम को याद,
जब हो मुश्किल की घड़ियाँ
तुमसे मांगे इमदाद,
सबसे बढ़के ऊँचा
जग में तेरा दरबार ।।२।।
चाहे दिन हो विपरीत,
होवे तुझ से ही प्रीत,
सच्ची श्रद्धा से गावें,
तेरी भक्ति के गीत,
होवे सबका प्रभु जी,
तेरे चरणों में प्यार ।।३।।
तू है सब जग का वाली करता
सबकी रखवाली,
हम है रंग-रंग के पौधे,
तुम हो हम सब के माली,
पथिक बगीचा है
यह तेरा सुंदर संसार ।।४।।
कबीर उवाच
चलती चक्की देखकर,
दिया कबीरा रोया।
दो पाटन के बीच में,
साबुत बचा न कोय ।।
कमाल उवाच
रोता कबीरा देखकर,
हंसा कमाल उठाय।
कील सहारे जो रहे,
ताको काल न खाय ।।










