आयु विषय विकारों में खोई जिसने सारी सच है
आयु विषय विकारों में
खोई जिसने सारी सच है
दुनियां वालों वह पूरा है अनाड़ी
१. ओम् नाम न कभी
ध्याया-शुभ कर्म न कोई कमाया।
मोह माया के जाल में
फंसकर सारा जीवन
यों ही गंवाया।
खोटी संगत से है
ग्रह बुद्धि गई मारी।।
२. धोखे से है धन तू कमाता-
अभक्ष पदार्थ सदा ही खाता।
दीन दुःखी पर दया करना
किस मुंह से मानव कहलाता ।।
साथ तेरे न जाना जिस
धन का बना पुजारी ।।
३. जिसने प्रीत प्रभु संग लाई
निश्चय उसका ओ३म् सहाई।
नन्दलाल कहे वह ही रक्षक
माता पिता बंधु और भाई ।।
है उसके बिना न कोई
है तेरा हितकारी ।।
ज्ञानदाता गुरु की निंदा करना तो दूर, निंदा सुननी भी नहीं चाहिए।










