यही चाहते हैं (स्वर-मेरे देवता मुझको)
यही चाहते हैं प्रभु दीनबंधु,
हमें आप अपने हृदय बसा लो।
सदा आपके हाथ संवरते रहे हम,
कृपा कीजिये और हमें जगमगाओ।।
यह संसार सागर न कोई
सहारा चली
बहती नैया न सूझे किनारा
तुम्हारे सिवा कौन जग में हमारा
दयामय दया के वरद को बढ़ाओ।।
यही चाहते है…….
निरोगी रहें हम अभोगी रहें हम,
न दुःख दे किसी को न शोकी बनें हम,
रहें डूबते स्नेह रस में तुम्हारे,
प्रभो! अपनी भक्ति को
प्रतिपल बढ़ाओ।
यही चाहते है……..
पियें प्रेम अमृत सभी को पिलायें,
जियें सर्वदा और सभी को जिलायें,
सुखी और सर्वदा ही रहें जीव सारे,
प्रभो! ऐसी करूणा सभी पर बनाओ।
यही चाहते हैं……
निष्ठा है जहाँ, प्रतिष्ठा है वहाँ।
प्रभुभक्ति है जहाँ, आत्मशक्ति है वहाँ।।










