जिस दिन घमण्ड अपने सर से उतार देगा।

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जिस दिन घमण्ड अपने सर से उतार देगा।

जिस दिन घमण्ड
अपने सर से उतार देगा।
उस दिन तुझे विधाता
अनमोल प्यार देगा।
जिस दिन घमण्ड अपने……..

उस के समान जग में
दाता न और कोई,
देने पे जब वह आया
तो बेशुमार देगा।
जिस दिन घमण्ड अपने……

मन वचन कर्म उसकी
आज्ञानुसार करले,
वह तो पिता है तुझ पे
सर्वस्व वार देगा।
जिस दिन घमण्ड अपने……

भगवान छोड़ साथी
इंसान को बनाया,
सुख में यह साथ देगा
दुःख में बिसार देगा।
जिस दिन घमण्ड अपने……

खुद ही न चैन जिसने
पाया हो जिन्दगी में,
वह क्या किसी के दिल को
सबरो करार देगा।
जिस दिन घमण्ड अपने…..

भेजा था उस ने जग में
करने को कुछ कमाई,
किस को पता था जीवन
यों ही गुज़ार देगा।
जिस दिन घमण्ड अपने……

अन्तिम समय कहेगा
नेकी कमा लूं लेकिन,
इक पल ‘पथिक’ न
कोई जीवन उधार देगा।
जिस दिन घमण्ड अपने……

तास्तुवाचः सभायोग्या याश्चित्ताकर्षणक्षमाः ।
स्वेषां परेषां विदुषां द्विषामविदुषामपि ॥

वे ही वाणियां सभा में प्रयोग के
योग्य होती है, जो अपनों, परायों,
विद्वानों, विरोधियों और मूर्खी के
चित्त को भी खींचने में सक्षम हैं।