जागे शंकर दयानन्द जागे

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जागे शंकर दयानन्द जागे

१. जागे शंकर दयानन्द जागे,
नास्तिक मत पाखण्डी भागे।
हुई वेद की जय-जयकार ॥

२. जागे थे प्रताप शिवाजी,
जीत गए मुगलों से बाजी।
रुक गए अत्याचार ।।

३. जागे थे गुरु गोविन्द प्यारे,
देश पे चारों बच्चे वारे।
वार दिया परिवार ।।॥

४. जागी थी झांसी की रानी,
इकली थी पर हार न मानी।
चमक उठी तलवार ॥

५. जागे थे भगत सिंह प्यारे,
असेम्बली में लग गये नारे।
हुई बमों की भरमार ॥

६. सुभाष चन्द्र नेता जी जागे,
अंग्रेजों के छक्के छुड़ा गये।
काँप उठी सरकार ।।

७. आर्यवीरों जागो जगाओ,
ऊँच-नीच का भेद मिटाओ।
करो देश उद्धार ॥

धर्म के नाम पर प्यारों
तुम्हें मरना नहीं आता,
लहू से काश ये तकदीर
तुम्हें भरना नहीं आता।
तुम्हारी तबाही का कारण है,
बस इतना मित्रो,
तुम्हें कहना तो आता है,
मगर करना नहीं आता।