यह तो हमने माना,आपकी प्रगति जरूर है

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यह तो हमने माना,आपकी प्रगति जरूर है

यह तो हमने माना,आपकी प्रगति जरूर है

यह तो हमने माना,
आपकी प्रगति जरूर है,
नाम न लो आराम का अभी
मंजिल बहुत दूर है।। टेक।।

उधर वह देखो भव्य भवन
छवि चूम रहे आकाश की,
सारी सुविधाओं से सज्जित
हो रहे भोग विलास की,
जिनमें दस्यु देश के दुश्मन
कालिमा इतिहास की खून
गरीबों का पी-पी कर तृप्ती
कर रहे प्यास की,
अपने कुकृत्यों पर फिर
भी उनको बड़ा गरूर है।।1।।

इधर यह देखों टूटे-फूटे
कच्चे घर झोपड़ियां हैं,
जिनमें निर्धन श्रमिक तन
निर्बल सूखी अन्तड़ियां हैं।
अरमानों की दुनिया लुटी
हर समय कहर की घड़ियां है।।

दिल में दर्द चेहरों पै झुर्री
आंखों में अश्कों की लड़िया हैं।
नफरत के पंजों में जकड़ी
मानवता मजबूर हैं, नाम न लो।।2।।

जातिवाद और प्रान्तवाद का
हो रहा यहां बोल बाला।
मत मतान्तरों का मनुष्यों की
बुद्धि के ऊपर ताला।

सम्मानित होवे समाज में
दुष्ट व्यक्ति मन का काला,
लगी बाग में आग राग गा रहा
मस्ती से रखवाला।
आदशों के लिये तुम में
संघर्ष शक्ति भरपूर है।।3।।

धर्म क्षेत्र से पन्थों मतों की
खर पतवार काट डालो।
इन्सानो के बीच भयंकर
पड़ी दरार पाट डालो,
देश के भक्तों से प्रेमी
कोमी गद्दार छांट डालो,

आर्य और दस्यु दो भागों में
संसार बांट डालो।
धर्म परायणता से भारत
दुनिया में मशहूर है।।4।