
आर्य प्रतिनिधि सभा आंध्र प्रदेश–तेलंगाना के तत्वावधान में एक अत्यंत गरिमामयी एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जो वैदिक संस्कृति, ज्ञान और मानव उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आयोजन केवल एक साधारण समारोह नहीं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और आध्यात्मिक चेतना को पुनर्जीवित करने का एक सशक्त प्रयास है। इस अवसर पर अनेक विद्वान, संत-महात्मा एवं समाजसेवी एकत्रित होकर वैदिक परंपरा के प्रचार-प्रसार का संकल्प लेंगे।
ग्रंथ लोकार्पण : ज्ञान और संस्कारों का अमूल्य प्रसार
इस पावन अवसर पर “ऋग्वेदादि भाष्य भूमिका (तेलुगु अनुवादित ग्रंथ)” का लोकार्पण किया जाएगा। यह ग्रंथ वेदों के गूढ़ एवं गहन ज्ञान को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे सामान्य जन भी वैदिक सिद्धांतों को समझ सकें और अपने जीवन में उतार सकें।
इसके साथ ही स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती जी द्वारा रचित “दिव्य मानव निर्माण विधि” का भी विशेष परिचय कराया जाएगा। यह ग्रंथ मनुष्य के चरित्र निर्माण, नैतिक उन्नति एवं आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है। इसमें बताए गए सिद्धांत आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं और युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं।
विशेष ग्रंथ विमोचन : विचारों का जागरण
कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक ग्रंथों का विमोचन भी किया जाएगा, जिनमें प्रमुख हैं:
- SWAMI DAYANANDA – THE MESSAGE AND MISSION
- मनुर्भव भाग–1 तथा मनुर्भव भाग–2
ये सभी ग्रंथ मानव जीवन के समग्र विकास, वैदिक आदर्शों की स्थापना एवं समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से लिखे गए हैं। इन ग्रंथों के माध्यम से पाठकों को सत्य, धर्म, कर्तव्य और आत्म-विकास के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलेगी।
विद्वानों का सान्निध्य : प्रेरणा और मार्गदर्शन
इस भव्य आयोजन में अनेक प्रतिष्ठित विद्वानों एवं संतों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी, जिनके विचार समाज को एक नई दिशा प्रदान करेंगे:
- मुख्य अतिथि: स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती (कामारेड्डी)
- विशिष्ट अतिथि: स्वामी चिदानन्द सरस्वती (पिंडिपेड़)
- अध्यक्षता: प्रो. विट्ठल राव आर्य (सभा प्रधान)
- संयोजन: श्री हरिकिशन वेदालंकार (मंत्री सभा)
इन महान व्यक्तित्वों के उद्बोधन से उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक उन्नति, नैतिक जीवन और समाज सेवा के प्रति जागरूकता प्राप्त होगी।
कार्यक्रम का उद्देश्य : समाज में वैदिक मूल्यों का पुनर्स्थापन
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार, मानव जीवन में नैतिकता एवं संस्कारों का विकास, तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। आज के समय में जब भौतिकता का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, ऐसे में इस प्रकार के कार्यक्रम समाज को संतुलित एवं सुदृढ़ बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।
यह समारोह विशेष रूप से युवाओं को सही दिशा, आत्मविश्वास और जीवन के उच्च आदर्शों की ओर प्रेरित करेगा।
कार्यक्रम का विवरण
- दिनांक: 19 अप्रैल 2026 (रविवार)
- समय: प्रातः 11:00 बजे से
कार्यक्रम के समापन के उपरांत सभी उपस्थितजनों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई है, जिससे सहभागिता और भी अधिक स्नेहपूर्ण एवं सार्थक बन सके।
विशेष आमंत्रण
समस्त आर्य समाजों, आर्य बंधुओं तथा धर्मप्रेमी सज्जनों से विनम्र निवेदन है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस पावन आयोजन को सफल बनाएं।
आपकी उपस्थिति न केवल इस कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाएगी, बल्कि वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
स्थान (Address)
पं. नरेंद्र भवन, राजमोहोला, हैदराबाद
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