आर्य समाज शास्त्री नगर मेरठ की 46वीं वर्षगांठ का भव्य आयोजन

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arya samaj shashtri nagar merath ki 46vi varshganth ka bhavya aayojan 2026

आर्य समाज शास्त्री नगर मेरठ की 46वीं वर्षगांठ: वैदिक संस्कृति और समाज सेवा का भव्य उत्सव

आर्य समाज शास्त्री नगर, मेरठ द्वारा 17 से 19 अप्रैल 2026 तक अपनी 46वीं वर्षगांठ बड़े हर्षोल्लास और वैदिक परंपराओं के साथ मनाई जा रही है। यह तीन दिवसीय आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि समाज में नैतिकता, शिक्षा और संस्कारों के प्रचार-प्रसार का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस पावन अवसर पर देश के प्रतिष्ठित विद्वान, भजन गायक और वैदिक आचार्य अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को दिव्यता प्रदान करेंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिदिन प्रातः यज्ञ, भजन और प्रवचन के साथ होगा, जिसमें मुख्य वक्ता आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री जी वैदिक ज्ञान की अमृतवर्षा करेंगे। भजन गायक पं. सतीश सुमन जी अपनी मधुर वाणी से वातावरण को भक्तिमय बनाएंगे। वहीं आचार्य रणधीर शास्त्री और डॉ. इंद्रदेव शास्त्री द्वारा यज्ञ का संचालन किया जाएगा, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा।

इस तीन दिवसीय समारोह में सुबह और शाम के सत्रों के साथ-साथ सामुदायिक भोज का भी आयोजन किया गया है, जो सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक है। विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों द्वारा सत्रों की अध्यक्षता की जाएगी, जिससे आयोजन की गरिमा और भी बढ़ेगी।

आर्य समाज शास्त्री नगर केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और शैक्षिक सेवाओं में भी अग्रणी है। यहां वैदिक साहित्य का विशाल पुस्तकालय उपलब्ध है, 16 संस्कारों की वैदिक व्यवस्था की जाती है, साप्ताहिक सत्संग, महिलाओं के लिए विशेष सत्संग, योग दर्शन पर व्याख्यान और प्रतिदिन यज्ञ का आयोजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त आर्य गेस्ट हाउस में विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी सुविधा उपलब्ध है।

इस आयोजन में अनेक समितियों का गठन किया गया है, जो इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। स्वागत समिति, यज्ञ एवं यजमान समिति, प्रसाद एवं भोजन समिति, प्रचार समिति आदि के सदस्य पूरे समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं।

आर्य समाज की यह वर्षगांठ केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि वैदिक संस्कृति, समाज सुधार और मानव कल्याण के संकल्प को पुनः जागृत करने का अवसर है। “कृष्णवन्तो विश्वमार्यम्” के आदर्श को अपनाते हुए यह आयोजन समाज को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा देता है।

सभी श्रद्धालुओं और समाजबंधुओं से आग्रह है कि वे अपने परिवार सहित इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर यज्ञ, प्रवचन और भजन का लाभ उठाएं तथा वैदिक संस्कृति के इस महोत्सव का हिस्सा बनें।

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