परमपिता से प्रीत लगा,भवसागर से पार होज्या

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परमपिता से प्रीत लगा,भवसागर से पार होज्या

परमपिता से प्रीत लगा,भवसागर से पार होज्या

परमपिता से प्रीत लगा,
भवसागर से पार होज्या
सत्संग में तू आया कर,
गुण ईश्वर के गाया कर।
मन अपने को शुद्ध बना-
भवसागर से पार होज्या…..

२. विषयों की चले अन्धेरी,
ज्योत बुझाई है तेरी।
जिससे अपने आप बचा-
भवसागर से पार होज्य…..

३. विषयों को ‘नन्दलाल’
तू छोड़ परमेश्वर से नाता जोड़।
जीवन वेद अनुसार बना-
भवसागर से पार होज्य…..

४. सत्संग में तू आयाकर,
गुण ईश्वर के गाया कर।
मन अपने को शुद्ध बना-
भवसागर से पार होज्य……