पाप करने ओ बशर तू छोड़ दे।
तर्ज – दिल के अरमा आँसुओं में……
पाप करने ओ बशर तू छोड़ दे।
नेकियों के साथ नाता जोड़ दे।
काम करना तू अकीदा
जो “सचिन” दुष्टता का दायरा सिकोड़ दे
नेकियों के साथ नाता जोड़ दे
पाप करने ओ………
दिल दुःखाना भी किसी का पाप है
नफरतों की ये दीवारें तोड़ दे
नेकियों के साथ नाता जोड़ दे
पाप करने ओ……….
एक दिन खा जायेगी
सबको अज़ल जुल्म से
मुँह को हमेशा मोड़ दे
नेकियों के साथ नाता जोड़ दे
पाप करने ओ………..
























