आर्यवीरदल वीर व्रती है
आर्यवीरदल वीर व्रती है,
पावन हल्दीघाटी है।
त्याग तपस्या शक्ति
भक्ति के हवनकुण्ड की माटी है॥
आर्यवीरदल हर दलदल में
कमल खिलानेवाला है।
दीनहीन और पराधीन को
मुक्ति दिलानेवाला है।
आर्यवीरदल हर घर पर
भगवा फहरानेवाला है।
जिनको चील गिद्ध ले भागे
वापस लानेवाला है।
शुद्धि बुद्धि की माला फेरे
यह वैदिक परिपाटी है॥१॥
आर्यवीरदल इस धरती पर
जीवन का भी जीवन है।
मृत भावों को जिला रहा
नित यह वैदिक संजीवन है।
आर्यवीरदल जहाँ जहाँ है
वहाँ वहाँ सत्यार्थ खड़ा।
महासमर की विजय पताका
शौर्यवीर्य पुरुषार्थ बड़ा।
अपने श्रम से संचित खाता
दाल चूरमा बाटी है॥२॥
आर्यवीरदल कुशल खिलाड़ी
इसे अनाड़ी मत कहना।
दलदल फँसी निकाले गाड़ी
बोतल ताड़ी मत कहना।
दिव्य सरौता काट रहा है
इसे सुपाड़ी मत कहना।
दूर सुदूर व्यसन से इसको
कभी पिलाड़ी मत कहना।
इसने शत्रुशिविर की सारी चढ़ी
पतंगें काटी है॥३॥
दयानन्द का दिव्य घोष है
रोष राम रामेश्वर का।
कुण्डल कवच योग के धारे
महातेज योगेश्वर का।
साहस शक्ति शिवालय
मुकुट धारता है परमेश्वर का।
कभी नहीं अन्याय करेगा
यह बेटा है ईश्वर का।
भेदभाव की सभी मनीषी
दुष्ट दरारें पाटी है।
आर्यवीर ने मर्यादा की शुद्ध
मलाई चाटी है॥४॥
























