नहीं बिगाड़ा भारत का, कुछ विदेशी तलवारों ने।
नहीं बिगाड़ा भारत का,
कुछ विदेशी तलवारों ने।
भारत को बरबाद किया है,
भारत के गद्दारों ने।
पृथ्वीराज के साथ यदि,
जयचन्द गद्दारी करता ना।
सपने में भी मुहम्मद गौरी,
कदम इधर को धरता ना।
सोमनाथ पर यदि पुजारी,
दिखलाते कायरता ना।
तो गजनी का मुहम्मद,
खजाने यहाँ से धन के भरता ना।
दाहर और जयपाल गंवा दिए,
खुदगरजी मक्कारों ने….।
नहीं बिगाड़ा भारत का कुछ………
गद्दारों का छोड़ा हुआ,
ना खाली अब तक तीर गया।
अमरसिंह को खत्म किया,
प्रताप को बना फकीर गया।
छत्रपाल शिवाजी नलवा,
पिंजरे में बन्दा वीर गया।
ब्राह्मणों का स्थान आज,
बन यवनों का कशमीर गया।
गोविन्दसिंह की कला छुपा ली,
सरहिन्द की दीवारों ने……।
नहीं बिगाड़ा भारत का कुछ……..
ऋषि दयानन्द को जहर पिलाकर,
खपा दिया गद्दारों ने।
श्रद्धानन्द को गोली मारकर,
मिटा दिया गद्दारों ने।
रंगून की घाटी में,
सुभाष को धोखा दिया गद्दारों ने।
अखण्ड भारत को कई हिस्सों में,
बांट दिया गद्दारों ने।
यवनों की तादाद बढ़ा दी,
बेहूदे प्रचारों ने।।
नहीं बिगाड़ा भारत का कुछ………










