योगीराज श्रीकृष्ण का, जीवन-चरित्र पवित्र।
योगीराज श्रीकृष्ण का,
जीवन-चरित्र पवित्र।
बारम्बार निहारिये,
यह मनभावन चित्र।।1।।
यह मनभावन चित्र,
मित्र जब मिले सुदामा।
छाती लिये लगाये,
करी स्वागत की सामा।।2।।
सब विधि से सत्कार,
प्यार कर के बैठाये।
देख दीन की दशा
अनु नयनन भर लाये।।3।।
ऐसे उपकारी महामानव
के गुण गायें।
उनके जन्मोत्सव को
मिलकर सभी मनायें।।4।।
कौन कहे श्रीकृष्ण जी,
पक्के माखन चोर।
समझ न पाएँ भक्तजन,
बुद्धि के कमजोर।।5।।
बुद्धि के कमजोर,
शोर यह वृथा मचाया।
वीतराग योगी को चोर-
जार बतलाया।।6।।
दूध, घृत, मथुरा में
बिकना बन्द कराया।
गोपीन के संग नहीं,
कृष्ण ने रास रचाया।।7।।
किया कंस का नाश
वंश का नाम मिटाया।
राधा के संग नहीं कृष्ण ने,
विवाह रचाया। ।8।।










