आर्यावर्त के वीर सपूतों, आगे कदम बढ़ाओ तुम।

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आर्यावर्त के वीर सपूतों, आगे कदम बढ़ाओ तुम।

आर्यावर्त के वीर सपूतों,
आगे कदम बढ़ाओ तुम।
करो वेद प्रचार जगत् में,
वैदिक धर्म निभाओ तुम । ।।1।।

वैदिक धर्म महान जगत को
सत्य मार्ग दर्शाता है।
सत्य, अहिंसा, सदाचार का,
जग को पाठ पढ़ाता है।।
जीव मात्र की करो भलाई,
पाप कर्म छुड़ाता है।

जन्म-जाति को,
छुआ-छूत को वेद विरुद्ध बताता है।।
दुर्गुण त्यागो सद्‌गुण धारों,
जीवन श्रेष्ठ बनाओ तुम।
करो वेद प्रचार जगत् में,
वैदिक धर्म निभाओ तुम।।2।।

सकल जगत में वेद विरोधी,
पाखंडी हैं घूम रहे।
ऊँचे-ऊँचे भवन खलों के,
आसमान को चूम रहे।।
चेला चेली बना रहे हैं,
लग जिनके हज्जूम रहे।
लूट रहे भोली जनता को,
मचा कुलाची घूम रहे।।

अंगराई ले उठो आर्यों!
पोपों के गढ़ ढाओ तुम।
करो वेद प्रचार जगत् में,
वैदिक धर्म निभाओ तुम।।3।।

पाखंड अविद्या की आंधी
जब भू-मण्डल पर छाई थी।
जब धूर्त स्वार्थी लोगों ने,
सारी दुनिया बहकाई थी।।
तब तुम्हीं बढ़े समरांगण में,
दुष्टों को धूल चटाई थी।
श्रद्धानन्द अरु लेखराम बन,
जग में धूम मचाई थी।

बन जाओ पंडित रामचन्द्र,
जग को पांडित्य दिखाओ तुम।
करो वेद प्रचार जगत् में,
वैदिक धर्म निभाओ तुम। ।4।।

अगर समय पर न जागोगे,
याद रखो पछताओगे।
हंसी उड़ाएगा जग सारा,
कहीं न आदर पाओगे।
आलस अरु प्रमाद त्याग दो
बनकर नारायण स्वामी।

मुनिवर, गुरुवर बन जाओ,
वैदिक प्रचारक नामी।।
‘नन्दलाल’ ऋषि दयानन्द का
कुछ तो कर्ज चुकाओ तुम।
करो वेद प्रचार जगत् में,
वैदिक धर्म निभाओ तुम ।।5।।