वैदिक धर्म का घर-घर में, जब तक प्रचार नहीं होगा,
वैदिक धर्म का घर-घर में,
जब तक प्रचार नहीं होगा,
दुनियां वालों दुनियां का,
तब तक उद्धार नहीं होगा।।
प्रातःकाल अमृत बेला में,
जंगल में प्रस्थान करें,
शौचादि से निवृत्त होकर,
तेल लगा स्नान करें।।
आसन, प्राणायाम द्वारा
वश में अपने प्राण करें,
योग के द्वारा लगा समाधि
परमेश्वर का ध्यान करें।।
जब तक घर में यज्ञ हवन का
धुंआधार नहीं होगा।।1।।
वैदिक धर्म का घर-घर में……
ब्रह्मचर्य का पालन करके,
फिर सारे घरबारी हों,
संशय नियम निभाने वाले,
सारे सतव्रत धारी हों।
माता-पिता, गुरुदेव प्रभु के,
सब जन आज्ञाकारी हों,
हरिश्चन्द्र दशरथ जैसा,
जब तक परिवारी नहीं होगा।।2।।
वैदिक धर्म का घर-घर में…….
काम, क्रोध, मद, लोभ,
मोह को ना अपनार्वे जीवन में,
अर्थ कमाना बुरा नहीं है,
ना आसक्ति हो धन में।
विश्व शान्ति हो जायेगी,
प्रीत लगेगी जन-जन में,
तज दे बुरे विचार हमेशा,
शुद्ध भावना हो मन में।।
हर प्राणी का सत्य सरल,
जब तक व्यवहार नहीं होगा।।3।।
वैदिक धर्म का घर-घर में…….
जितने भी सृष्टि में प्राणी,
उन सबको जीने दो,
धरती की छाती की अमृत,
हर प्राणी को पीने दो।
सर्दी गर्मी धूप छांव,
मौसम दिन-रात महीने दो,
दूर नीर सा प्यार बढ़ेगा,
फटे हुए दिल सीने में।।
लक्ष्मणसिंह ‘बेमोल’ शुद्ध,
जब तक आहार नहीं होगा।।4।।
वैदिक धर्म का घर-घर में………










