ईश्वर बिना विचारिये, सृष्टि रचाये कौन ?
ईश्वर बिना विचारिये, सृष्टि रचाये कौन ?
नियमों में प्राणीमात्र को, क्रम से चलाये कौन ?
हाँ क्रम से चलाये कौन?……..
कहते हैं जो कि जगत्, अपने आप बन गया,
नक्षत्र-ग्रहों पर, कभी विचार ना किया।
अम्बर संभाल आश्रय के, बिन दिखाये कौन ?
नियमों में प्राणीमात्र को, क्रम…..
माता के गर्भ में हुई तैयार मूर्ति,
अंगों की ठीक-ठाक हो रही पूर्ति।
निर्माण-शाला में भला साधन जुटाये कौन ?
नियमों में प्राणीमात्र को, क्रम……
व्यवस्था कौन कर्म के, फल की है कर रहा,
किसके प्रबन्ध में है प्राणी, फल को पा रहा ?
नियंत्रणकर्ता है, नियंता के सिवाय कौन ?
नियमों में प्राणीमात्र को, क्रम…….
नीचे तो जल है, जल पे थल की सृष्टि दी रचाय,
सागर के सीने पर ही, मानों नाव दी चलाय।
ऐ ‘देश’ जल पै माटी की, नैया चलाये कौन ?
नियमों में प्राणीमात्र को, क्रम………










