करो मन ओ३म् का सिमरन,अगर मुक्ति को पाना है।

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करो मन ओ३म् का सिमरन,अगर मुक्ति को पाना है।

करो मन ओ३म् का सिमरन,
अगर मुक्ति को पाना है।
अरे बाबा ये वो घर है, जो,
एक दिन छोड़ा जाना है।।
करो मन ओ३म् का सिमरन …….

न पाँवों से गया सत्संग,
किया न दान हाथों से।
जुबाँ से न किया सुमिरन,
तेरा किस जाँ ठिकाना है।।
करो मन ओ३म् का सिमरन……

अवस्था जा रही तेरी,
बचा ले ओ३म् सुमिरन से।
तेरे कर्मों का सब परिचय,
तेरे दर पेश आना है।।
करो मन ओ३म् का सिमरन…….

जो रिश्तेदार हैं तेरे,
जिन्हों से है तेरी उल्फत।
उन्होंने रख के अग्नि में,
तुझे एक दिन जलाना है।।
करो मन ओ३म् का सिमरन……

तेरे दम में जो दम आता,
तुझे खुद ही नजर आता।
बना ले खर्च ए बन्दे,
वहाँ जो पहुँच खाना है।।
करो मन ओ३म् का सिमरन…….

सुविचार

स्वर्ग कामो यजेत्
स्वर्ग की कामना के लिए यज्ञ करें।