भक्ति
तू ही इष्ट मेरा, तू ही देवता है….
तू ही बन्धु सबका, तू माता-पिता है।
नहीं है कोई चाहना और दिल में….
तुझे चाहता हूँ, यही चाहना है ।।1।।
तू ही इष्ट मेरा………….
ये क्यों ढूंढ़ता फिर रहा है जमाना ?
तू दिल में है और दर्दे-दिल की दवा है।
खतावार हैं हम सभी दुनियाँ वाले –
मगर विश्व में एक तू बेखता है।।2।।
तू ही इष्ट मेरा ………
जहालत से हम तुझको देखें न देखें –
मगर तू हमें हर घड़ी देखता है।
पता पत्ता-पत्ता तेरा दे रहा है-
ये बिल्कुल गलत है कि तू लापता है।।3।।
तू ही इष्ट मेरा……….
अगर दर्द दिल है तो दिल को टटोलो-
कि दिल में ही इस दर्दे दिल की दवा है।
बहुत कोशिशें की बहुत सर खपाया –
समझ में न आया कि संसार क्या है ।।4।।
तू ही इष्ट मेरा ……….
जवानों जवानी में कुछ काम कर लो –
समझते हो जिसको जवानी हवा है।
‘मुसाफिर’ जरा इस मुसाफिर से पूछो
कहाँ से चला है? कहाँ जा रहा है ।।4।।
तू ही इष्ट मेरा ……….










