मेरा उद्देश्य हो प्रभु, आज्ञा को तेरी पालना।

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प्रार्थना

मेरा उद्देश्य हो प्रभु, आज्ञा को तेरी पालना।
कर कर कमाई धर्म की, अर्पण तेरे कर डालना।।


मानव के नाते हे पिता, जाऊँ कहीं जो भूल मैं।
इतनी विनय है आपसे, बन कर सखा संभालना।।
मेरा उद्देश्य हो प्रभु, आज्ञा को ………

जितने भी यज्ञ कर्म हों, श्रद्धा व प्रेम से करूँ।
आएं अभद्र भाव जो, उनको सदा ही टालना।।
मेरा उद्देश्य हो प्रभु, आज्ञा को ……

रक्षा तो मेरी तू करे, रक्षा में तेरी मैं रहूँ।
अपने गुणों के सांचे में, जीवन को मेरे ढालना।।
मेरा उद्देश्य हो प्रभु, आज्ञा को …….

मृत्यु का मुझको भय न हो, मांगू यही वरदान मैं।
बुद्धि मेधावी की मेरी, झोली में भिक्षा डालना।
मेरा उद्देश्य हो प्रभु, आज्ञा को ………