ईश महिमा
प्रणाम कोटि-कोटि, सारे जहाँ के वाली।
अद्भुत है तेरी रचना, हर शै तेरी निराली।।
कण-कण में तू व्यापक, सूक्ष्म है रूप तेरा।
तारों में तू है रोशन, सूरज में तेरी लाली ।।
अद्भुत है तेरी रचना, हर शै…………
फूलों में गन्ध तेरी, पत्तों में रंग तेरा।
अनुभव तेरा कराती, गुलशन की डाली-डाली।।
अद्भुत है तेरी रचना, हर शै……
पालक है तू जगत का, दिन रात दे रहा है।
आया जो तेरे दर पर, लौटा कभी ना खाली।।
अद्भुत है तेरी रचना, हर शै………
भक्ति की भीख माँगें, तुझसे हे ईश मेरे।
दामन को मेरे भर दो, चरणों में है सवाली।।
अद्भुत है तेरी रचना, हर शै……
प्रणाम कोटि-कोटि, सारे जहाँ के वाली।
अद्भुत है तेरी रचना, हर शै तेरी निराली।।
अद्भुत है तेरी रचना, हर शै…………










