जरा तो इतना बता दो भगवान।

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ईश महिमा

जरा तो इतना बता दो भगवान।
लगन ये कैसी लगा रहे हो।
मुझी में रहकर मुझी से मेरी।
यह खोज कैसी करा रहे हो।।

हृदय भी तुम हो, तुम ही स्पंदन
प्रेम भी तुम हो तुम ही हो प्रियतम।
पुकारता मन तुम ही को क्यों है।
तुम ही जो मन में समा रहे हो।।

सीप भी तुम हो तुम्हीं हो मोती।
दीप भी तुम हो, तुम ही हो ज्योति।
तुम्हीं को लेकर तुम्हीं को ढूंढ़।
नयी यह लीला बता रहे हो।।

मन भी तुम हो तुम्हीं हो रसना।
गीत तुम हो तुम ही हो रचना।।
स्तुति तुम्हारी तुम्हीं से गाऊँ।
नयी यह रीति बता रहे हो।।

कर्म भी तुम हो तुम ही हो कर्ता।
धर्म भी तुम हो, तुम ही हो धर्ता ।।
निमित्त कारण मुझे बना कर।
यह नाच कैसा नचा रहे हो।।