भारत में भया अनाचार का अपार भार

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भारत में भया अनाचार का अपार भार

दयानन्द बावनी
कवि दूलेराय काराणी

नरसिंह अवतार

भारत में भया अनाचार का अपार भार।
हुआ हाहाकार हर्नाक्ष के हुंकार सा॥

धर्म भयो लोप महापाप को प्रकोप भयो।
उठा चित्कार प्रह्लाद के पुकार सा॥

काराणी कहत चढ़ी आंधी अधर्म की जब।
घेरा चारों ओर अंधाधुंध अंधकार सा॥

काले कलिकाल के कराल लाल खम्भ से द्वि-
आया दयानन्द नरसिंह अवतार सा॥३०॥