दयानन्द बावनी
कवि दूलेराय काराणी
आर्यत्व उद्धारक
पूर्व को प्रकाश कैधों पृथ्वी पे प्रकट भयो।
कैधों उत्तरायण को तेज दीप आयो है।।
असत्य के सागर के सर्व-गर्व-गंजन को।
कैधों रघुनाथ आप चाप को चढ़ायो है।।
सारी वनराजी नए रंग में नचायबे को।
कैधों ऋतुराज आज छिति पे छवायो है।।
काराणी कहत नवयुग के जगायबे को।
कैधों आर्यत्व को पुनरुद्धारक आयो है।। २८।।
























