तेरी लाठी बे आवाज़ है
- भक्त जनों का रखवाला भगवान् गरीब नवाज़ है।
सारी दुनियाँ मान गई तेरी लाठी बे आवाज़ है।
१. कान नहीं सुनता है सब की।
हाथ नहीं पर पकड़ ग़ज़ब की।
देव तुम्हारे न्यायालय में चलता नहीं लिहाज़ है।
तेरी लाठी…..
२. कोई तुझे माने न माने।
पहचाने या न पहचाने।
तीर न तेरा ख़ाली जावे बड़ा निशानेबाज़ है।
तेरी लाठी…..
३. कब किस वक्त कहाँ क्या होवे ।
कब इनसान हँसे कब रोवे।
कौन तुझे पहचान सका तू ख़ुश है
या नाराज़ है।
तेरी लाठी….
४. किसी ने पाया प्यार तुम्हारा।
किसी पे तूने कष्ट उतारा।
अजब तुम्हारी कारगुज़ारी
अजब तेरा अन्दाज़ है।
तेरी लाठी……
५. सभी उजाले सभी अन्धेरे ।
सब के सब हैं वश में तेरे।
स्वयं बनावे स्वयं बजावे
यह दुनियाँ इक साज़ है।
तेरी लाठी…..
६. कैसे तू संसार चलावे।
कहाँ बैठकर डोर हिलावे ।
‘पथिक’ सदा यह राज़ रहा है
और आज भी राज़ है।
तेरी लाठी…..










