तू कर ले प्रीति ओम् से
ओ अभिमानी बन्दे ! तू कर ले प्रीति ओम् से।
तज कर झूठे धंधे ! तू कर ले प्रीति ओम् से।
ओ अभिमानी बन्दे…………
प्रातः सायं नित्य प्रेम से ईश्वर के गुण गाएगा।
सच्चे परमानन्द की पूँजी जीवन में ही पाएगा।
कट जाएँगे फँदे ! तू कर ले प्रीति ओम् से।
ओ अभिमानी बन्दे……….
कर के हवन सुगन्धि से दुर्गन्धि दूर भगाया कर।
तन के मैल पसीने से न बदबू ही फैलाया कर।
रोम रोम के गंदे ! तू कर ले प्रीति ओम् से।
ओ अभिमानी बन्दे…………
मानव तन अनमोल रतन था मिला तुझे संसार में।
चाँदी के सिक्कों के बदले बेच दिया बाज़ार में।
अरे अकल के अंधे ! तू कर ले प्रीति ओम् से।
ओ अभिमानी बन्दे………..
जो तू चाहे सदा ‘पथिक’ यह दुनियाँ तुझ से प्यार करे।
मन वाणी और कर्म से फिर तू क्यों न सद्व्यवहार करे ।
कर्म छोड़ दे मंदे ! तू कर ले प्रीति ओम् से।
ओ अभिमानी बन्दे…………










