सुबह दुहो शाम दुहो
सुबह दुहो शाम दुहो,
प्रभात दुहो मध्याह्न दुही ।।१।।
ब्रह्म तो अमृत अनन्त है,
हर पल हर क्षण ज्ञान दुहो ।। २।।
घट घट उसकी शक्ति है,
भक्ति कर से आसान दुहो ।। ३।।
वेद तो उसकी तान है,
महनत कर नया विहान दुहो ।।४।।
सुबह दुहो शाम दुहो
सुबह दुहो शाम दुहो,
प्रभात दुहो मध्याह्न दुही ।।१।।
ब्रह्म तो अमृत अनन्त है,
हर पल हर क्षण ज्ञान दुहो ।। २।।
घट घट उसकी शक्ति है,
भक्ति कर से आसान दुहो ।। ३।।
वेद तो उसकी तान है,
महनत कर नया विहान दुहो ।।४।।
यदि नहीं जान पाए, अपने आप को, फिर कैसे जानोगे, भैया पुण्य पाप को ।।
जो भी बुरा-भला है, ईश्वर ही जानता है।
प्रभु दर्शन करने आये थे, प्रभु दर्शन पाना भूल गए।
सत्ता तुम्हारी भगवन् जग में समा रही है।
बिना वेद विद्या न कल्याण होगा
भूख नियत ना है सब के लिए।
ओ३म् की ध्वज के तले ।
नर तन को पा करके
महर्षि के बताये हुये मार्ग पर सारा संसार
प्रभु भक्ति में चूर रहते हैं
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