विश्वविदित गुजरात देश में टंकारा इक सुन्दर ग्राम।

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विश्वविदित गुजरात देश में टंकारा इक सुन्दर ग्राम।

विश्वविदित गुजरात देश में,
टंकारा इक सुन्दर ग्राम।
उसमें था औदीच्य ब्राह्मणों का,
कुल बहुश्रुत एक ललाम ।
पुत्र लालजी के कर्सनजी,
थे उसके मुखिया अभिराम ।
महादेव में अविचल श्रद्धा,
उनकी रहती आठों याम ॥ १॥

उनके कुल दीपक दयालजी,
थे जन्मे अति प्रतिभावान् ।
शिवरात्रि व्रतपूजन में थे,
पित्राज्ञा से श्रद्धावान् ।
शिवमन्दिर में निशि भर जागे,
अटल ध्यान हो निष्ठावान् ।
पर शिवपिण्डी पर चूहे की,
लीला देख रहे हैरान ॥ २॥

बोध हुआ उनको तब ही से,
हो नहिं सकता शिव पाषाण।
है यह जगती-तल में फैला,
जड़ पदार्थ-पूजा अज्ञान।
निराकार शिव की पूजा ही है
वेदोक्त सनातन-ज्ञान ।
इसी ज्ञान की महिमा से वे
दयानन्द बन गये महान् ॥ ३॥

रुचिरा

उस ही दिन से शिवरात्रि
भी बोधरात्रि विख्यात हुई।
बोधदान से आर्यजनों को,
महिमा उसकी ज्ञात हुई ॥

पर्व रूप में तब ही से वह,
जनता में सुप्रसिद्ध हुई।
उसे मनाकर आर्य मण्डली,
वास्तव-ज्ञान-समृद्ध हुई ॥ ४॥