जिसकी पवित्र वेदविद्या मंगला के आगे
जिसकी पवित्र वेदविद्या मंगला के आगे,
पापिनी अविद्या दुःखद का मुख बन्द है।
लुक्कड़ लताड़े, मतवाले दर्पहीन किये,
जानता जिसे न ऐसा कौन मति-मन्द है?
धर्म-धारणा से सारे देशों का सुधार किया,
जिसका अमोघ उपदेश सुखकन्द है।
सूझी शिवरात्रि को महेश की महत्ता जिसे,
सत्य मूलशंकर वही तो दयानन्द है।










