ले बाँध ले गठरी कर्मों की
ले बाँध ले गठरी कर्मों की
जग जोगी वाला फेरा है
दुनिया ये सराय पानी है
बस पल-दो-पल का डेरा है
सुख की कलियाँ, दु:ख के काँटे
मालिक ने बराबर हैं बाँटे
करनी के मुताबिक देने को
उस परम-पिता ने जो छाँटे
क्या लाया था जो छूट गया
क्यों करता मेरा-मेरा है
दुनिया ये सराय पानी है
बस पल-दो-पल का डेरा है
ले बाँध ले गठरी कर्मों की
जग से जो गया फिर ना लौटा
ये अटल-नियम है दाता का
सौ जन्मों में भी न उतरे
वो कर्ज पिता और माता का
फिर किस पे तू इतना गुमान करे
जीवन माटी का ढेरा है
दुनिया ये सराय पानी है
बस पल-दो-पल का डेरा है
ले बाँध ले गठरी कर्मों की
मतलब की है दुनियादारी
झूठे नाते रिश्तेदारी
छूटी साँसे तो छोड़ चले
झूठी निकली सबकी यारी
जब अन्त समय आया तो जाना
इक सच्चा सहारा तेरा है
दुनिया ये सराय पानी है
बस पल-दो-पल का डेरा है
ले बाँध ले गठरी कर्मों की
जग जोगी वाला फेरा है
दुनिया ये सराय पानी है
बस पल-दो-पल का डेरा है
ले बाँध ले गठरी कर्मों की
स्वर :- श्री राकेश जी मेहता, सम्पर्क सूत्र 9313433300, 9212331980










