प्यारी-प्यारी ज़िन्दगी है

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प्यारी-प्यारी ज़िन्दगी है

तर्ज – चुप-चुप खड़े हो…….

प्यारी-प्यारी ज़िन्दगी है,
कुछ तो विचार कर।
नेकियाँ कमा ले बन्दे,
बदियाँ बिसार कर।।

धर्म को निभाया कर,
पाप ना कमाया कर रसना
से ओ३म् नाम, सुबह शाम गाया
कर स‌द्भाव दिल में, ‘सचिन’
उतार कर नेकियाँ कमा ले……

झाकियाँ निकालकर,
गलियों में डोलता हर-हर बम-बम,
खूब रहा बोलता फिर भी ना पाया शिव,
हारा है पुकार कर नेकियाँ कमा ले……

अवसर सुनहरा ये,
छूट नहीं जाये कहीं लड़ी ज़िन्दगी की,
टूट नहीं जाये समय बड़ा कीमती यूँ,
ऐसे ना बेकार कर नेकियाँ कमा ले……

छल व कपट में, मन जो फँसाओगे
वेद के बयान है ये, नहीं सुख पाओगे
श्वासों में है तेरे ओ३म्,
उसको तू प्यार कर नेकियाँ कमा ले……