बहनों भाइयों आओ,सब मिल करके गाओ।
बहनों भाइयों आओ,
सब मिल करके गाओ।
हृदय से उपकार
कृष्ण भगवान के।। टेक ।।
पश्चिमी सभ्यता का जब
दरिया उमड़ आया था।
वैदिक सभ्यता का बेड़ा
भंवरों में चकराया था।।
खिवैया कन्हैया बने
लेकर नइया।
चले आये इस पार
बाहर तूफान के ।।1।।
कालयवन शिशुपाल जरासन्ध
कंस बनाकर टोली।
भारतीय संस्कृति की जब
फूकं रहे थे होली।।
विलक्षण नीति से
कोध से प्रीति से।
किया उनका संहार
उचित समय जानके ।।2।।
राजनीति के कुशल खिलाड़ी
धार्मिक महान सुधारक ।
गीता के उपदेशक योगेश
वेदों के उद्धारक ।।
धर्म धीरता का कर्म
वीरता का कहें उन्हें
अवतार अति उत्तम मान के।।3।।
भारत में महाभारत रचकर
भारत विजयी कराया।
गृहस्थ में रहकर आप्त
पुरूष और ब्रह्मचारी कहलाया ।।
शोभाराम उन्हें कोटी
प्रणाम उन्हें।
करे हजारों बार मध्य
में गान के।।4।।
मद्य पान परस्त्री गमन में
जुए में आसक्त है जो।
कुपात्रों को दान जो दे
जितना पापी कम्बख्त वो।।
जिसने किया यह नीच इरादा
इन सब पापियों से भी ज्यादा।
मां उसे पाप लगे।।5।।
जिसने राम को वन भिजवाया
हृदय ज्ञान चक्षु फूटें।
विधि पूर्वक कमाई हुई
धन सम्पत्ति दस्यु लूटें ।।
गुरू स्त्री गामी और मित्र द्रोही,
पाप के भोगी जितने सोई।।
मां उसे पाप लगे।।6।।
प्रातः सायं दोनों सन्धियों में
है पाप जो सोता है।
स्त्री बालक बृद्ध के वध
करने में पाप जो होता है।।
दस्यु पामर पापी पातक
बना है जो रघुकुल का घातक।
मां उसे पाप लगे।।7।।
विद्वान रक्षक माता पिता की
सेवा का न पुण्य मिले।
सज्जन समाज से बहिष्कृत
हो सत्कर्मों में मन ना चले।।
प्यासे को जल न पिलाने
का सोते हुओं के घर जलाने का।
मां उसे पाप लगे।।8।।
शोभाराम जिसकी सम्मत्ति
से आर्य राम गये वन में ।।
वह बहुत सन्तान वाला हो
दरिद्री हो रहे ज्वर तन में।
कपटप्रिय बेईमान चुगलखोर
जिस हालत में हो वह जिस ठौर।
मां उसे पापलगे।।9।।










