मेरे देश की हालत डामां डोल

0
25

मेरे देश की हालत डामां डोल

मेरे देश की हालत डामां डोल,
नीचे से ऊपर तक शासक
प्रशासक सब ढके ढ़ोल। टेक।

हैं राम राज की आज लूट,
कोई रोक टोक नही खुली छूट।
सब आपाधापी पड़े हुये,
देखो किस करवट बैठे ऊँट।

जुड़ रहे गठ बन्धन टूट टूट,
छल कपट झूठ की खुली पोल ।।1।।
पैसे का कैसा घेरा हे,
देखो देखो चौफेरा है,
अपने अपने दायरे में
हर व्यक्ति चोर लुटेरा है,
कोई छोटा चोर कोई बड़ा चोर,
जहां देखें वहीं पर खड़ा चोर।

चहूं ओर शोर है चोर चोर,
कहीं धड़ा चोर कहीं छड़ा चोर,
भर रहे पाप का घड़ा चोर,
है एक से एक यह दुनियां गोल ।।2।।

व्यक्ति व्यक्ति व्यक्ति के साथ,
उत्पात घात कर नाथ नाथ,
लगभग ठग ठग को रहा है ठग,
ठग का ठग की पाकिट में हाथ,
बात बात में वारदात बिगड़े
हालात गन्दा माहौल ।।३।।

आग जड़ों में बाल रहे और
पत्तों पर जल डाल रहें,
मंजिल पर कैसे पहुँचे
जब उल्टे राह को चाल रहे,
आस्तीनों में पाल रहें,
विषधर विष पिलायें
घोल घोल ।।4।।

यदि आप पाप को कहें पाप,
तो करना होगा पश्चाताप है
आज राज में यह रिवाज
काई बोलो मत देखों
चुपचाप है रोक टोक में
नोक झोक पैरो में बेड़ी
गल में तोक,
पकड़ो पल्ला बोलों हल्ला,
जा रहे गर्त में दोनों लोक,
लगती नहीं पत्थर पै जौक
समझाने को समझे मखौल । ।5।।

दें दोष किसे हम सब निभार्ग,
इतिहास में एक वदनमा
दाग प्रेमी देंखें चुप-चाप खड़े
हंसों का हक रहे छीन कांग
सदियों तक ना बुझे आग दई
लगा छिड़क कर पैट्रोल।।6।।