आर्यो का मेला दिखा दे सजना मुझें

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आर्यो का मेला दिखा दे सजना मुझें (धुन- आगरे का घाधरा)

आर्यो का मेला दिखा दे सजना मुझें,
आर्यों का मेला ।। टेक ।।
ऋषि मुनि योगी सन्यासी,
विद्वत मन्डल प्रचारक ।।
त्यागी तपस्वी सन्त महात्मा,
वैदिक धर्म के प्रसारक।
एक से एक सुधारक,
आ रहा दयानन्द का चेला ।।1।।

मन की शुद्धि सत्य से हो,
बुद्धि की शुद्धि ज्ञान करे।
तन की शुद्धि जल से हो
और धन की शुद्धि दान करें।
जीवन का कल्याण करे-
इस तन का उठैना धेला ।।2।।

ब्रहमयज्ञादि पंच महायज्ञ,
गृहस्थ के नित्य कर्म कहें।
जिसमे दानों लोक सुधर जा,
उसको वैदिक धर्म कहें।
और को मिथ्या भ्रम कहें,
एक वैदिक धर्म सहेला।।3।।

न जाने किस विद्वान की
कौन बात हृदय पर जम जाये।
प्रेमी गर्त के गड्ढे में गिरने से
जीवन थम जाये।
सबके साथ में हम जायें,
चले जाना नहीं अकेला ।।4।।