छेड़ छाड़ जब कहीं कोई हमसे आतंताई करते हैं।

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छेड़ छाड़ जब कहीं कोई हमसे आतंताई करते हैं।

छेड़ छाड़ जब कहीं कोई हमसे
आतंताई करते हैं।
हो करके मजबूर तभी हम
उनसे लड़ाई करते हैं।
हमारी सहनशीलता का
जो उल्टा अर्थ लगाते हैं।
पढ़ देखो इतिहास उन्हें
हम कैसा पाठ पढ़ाते हैं।
पहले तो हम बातों बातो से
बातें समझाते हैं।
जो बातों से नहीं माने तो
लातों से मनवाते हैं।
धूर्त पाखण्डी दुराचारी जब
लूट मचाई करते हैं।
होकर के मजबूर तभी
हम उनसे लड़ाई करते हैं।।1।।

आतंकित जब रावण ने
सारे संसार को कर डाला।
तब समाप्त हमने उसके
सारे परिवार को कर डाला।
भाई ने जब भाई पर ही
अत्याचार को कर डाला।
क्रुद्ध होकर के तब हमने
बाली संहार को कर डाला।
दुखिया पीड़ित अनाथों की
जो नही सुनाई करते हैं।
होकर के मजबूर तभी
हम उनसे लडाई करते हैं।।2।।

दुर्योधन चाण्डाल चौकड़ी का
जब यहां आतंक छाया।
देकर के प्रमाण अनेकों हमने
उनकों समझाया।
समझाने का दुष्परिणाम
प्रकोप भयंकर हो आया।
कुरूक्षेत्र की भूमि पर तब
हमने उनको मरवाया।
शिशुपाल की सौ गाली
सुनने की समाई करते है।
होकर के मजबूर तभी
हम उनसे लड़ाई करते हैं।।3।।

सात सौ वर्ष यवनों की
हकूमत से यूहीं तकरार रहा।
दौ सौ वर्ष तक अग्रेजों के
साथ यही व्यवहार रहा।
बार बार कर वार यह
पाकिस्तान हार सिरमार रहा।
सावधान जो हमसे टकराने को
हो तैयार रहा।
सोच समझ पग उठाना
प्रेमी बुरी पिटाई करते हैं।
होकर के मजबूर………

कवित्त

हिल मिल जो जाने-तासो
मिलके जनावे हेत हिलमिल न जाने,
ताको हित न विसाहिये होय
मगरुरी तासो,
दूनी मगरुरी करे लघु होय चले
तासो लघुता निभाईये
वोधा कवि कहे यह नीति के
निवारण हेत आपको सराहे
ताहे आप हू सराहिये
राजा होय रंक होय शायर होय
शूर होय आपको न चाहे
ताके बाप को न चाहिये ।।