एक घर का राजा एक है घर की रानी

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एक घर का राजा एक है घर की रानी (धुन- एक गलियों का राजा)

एक घर का राजा एक है घर की रानी,
जब सद्‌गृहस्थी बन गये
तो फिर कैसी खैचा तानी,

फूलों की भांति पति पत्नी खिलके,
जीवन की राहों में चलें दोनो मिलके,
जैसे मिले हैं आपस में दूध और पानी ।।1।।

दो नदियों का जल मिले जैसे,
पति पत्नी का मन मिले ऐसे,
जीवन सफल हो,
सुखी हो, जिन्दगानी।।2।।

जैसे गाड़ी के दो पहिये,
मिलकर ऐसे चलते रहिये,
मन्जिल पै जाने की
यही एक निशानी। ।3।।

गृहस्थ धरा पै स्वर्ग की झलकी,
समझो इसे करो मन्जिल को हल्की,
प्रेमी कभी भी न कर देना नादानी।।4