तैने घाव किया तू ही दवा लगा।

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तैने घाव किया तू ही दवा लगा।

तैने घाव किया तू ही दवा लगा।
मत और आग को हवा लगा।।
पाण्डु पुत्रों को मेरे पास।
ले आओं पूर्ण करो आस ।।
मैं उनको गले लगा लूँगा।
पुत्रेष्णा आग बुझा लूँगा।।

माधव बोले उत्तम विचार।
यह मुझे आपका है स्वीकार।।

मैं हृदय से यही चाहता हूँ।
जा रहा बुला कर लाता हूँ।।

युधिष्ठिर से परामर्श किया।
पाँचों भाईयों को साथ लिया ।।

आगे क्या कुछ होने वाला।
यह जानते थे सब नन्द लाला ।।

लोहे के भीम को उठवा कर ।
आ गये जहाँ था धृतराष्ट्र ।।

महाराज को करके नमस्कार।
श्री कृष्ण ने फिर योजनानुसार ।।

भीम को पीछे हटा दिया।
चारों भाईयों को आगे किया।।

महाराज ने गले लगा करके।
सिर ऊपर हाथ फिरा करके ।।

चारों को आशीर्वाद दिया।
हृदय से प्रेम प्रसाद दिया।।

भीम का जब नम्बर आया।
लोहे का पुतला उठवाया ।।

महाराज के पास में ले जाकर।
केशव बोले यह वृकोदर ।।

श्री कृष्ण ने भीम नाम बोला।
सुन धृतराष्ट्र का खून खोला ।।

पुत्रेष्णा मन में जाग गई।
क्रोधानल तन में लाग गई।।

बोला यह भीम है हत्यारा।
कौरवों को इसने ही मारा।।

पुतला पकड़ मरोड़ दिया।
लोहे के भीम को तोड़ दिया।।

मोह का है यह दुष्परिणाम।
इससे बच रहना शोभाराम ।।