सबसे अच्छा परहित काम
सबसे अच्छा परहित काम,
परहित करे वही इन्सान ।
मानव में बसे भगवान,
मानव सेवा पुण्य का काम ।।
खुद जैसा ही सबको जान,
खुद में सबमें एक से प्राण।
कड़ी महनत समज से काम,
बाजार में घटाए ये दाम ।।
सबसे अच्छा परहित काम
सबसे अच्छा परहित काम,
परहित करे वही इन्सान ।
मानव में बसे भगवान,
मानव सेवा पुण्य का काम ।।
खुद जैसा ही सबको जान,
खुद में सबमें एक से प्राण।
कड़ी महनत समज से काम,
बाजार में घटाए ये दाम ।।
ऐ मेरे वतन के लोगो तुम खूब लगालो नारा।
हम सैनिक ऋषि दयानन्द के दुनिया में धूम मचा देंगे।
भारत म्हारो देश फूटरो वेश के धन-धन भारती।
हँसते-हँसते जिया करें
दयानन्द के वीर सैनिक बनेंगे
जो दुःखियों की सेवा में तन मन लगाए
जग को जगाने वाला-आर्यसमाज है।
हम रुकना झुकना क्या जानें
इश्क जिनको है अपने वतन से
ना रहे युवक ब्रह्मचारी
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