गाना गवाना कुछ नहीं

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गाना गवाना कुछ नहीं

गाना गवाना कुछ नहीं,
यह अन्तर पट की आवाज है,
हैं विचार ऋषि महर्षियों के,
मेरे कहने का अन्दाज है।

अनन्त गुण हैं अनन्त के,
शाश्वत नियम सर्वज्ञ का,
जो आज है वही कल भी था
जो कल भी था वही आज हैं।।1।।

त्रेतवाद त्रिकाल बाधा
रहित सत सन्देश का,
सिद्धान्त यह निर्भान्त है
जिसका वह आर्य समाज है।।2।।

वह आर्य है जिसकी करनी
और कथनी एक है,
हृदय में दया उदारता
आँखों में जिसकी लाज है।।3।।

मन वचन और कर्म जिसके
आत्मा के विरूद्ध हैं,
उसे आर्य कोई मत कहो
“प्रेमी” वह धोखेबाज है। ।4।।